प्रसव के बाद महिलाओं में होते हैं यहे बदलाव

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Body changes after childbirth

जब महिलाये गर्भावस्था में होती हैं तो मानसिक और शारीरिक रूप से बदलने लगती हैं बिलकुल उसी तरहे उनमे प्रसब के बाद बदलाव आते है।कुछ महिलाये प्रसब के बाद आपना इतना ख्याल रखती हैं और अपने आप को इतना चेंज कर लेती है की लगता ही नही हिया की वो गर्भवती हुई थी। आये जाने की क्या बदलाव आते हैं उनमे

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वजन का बढ़ जाना

जब औरत गर्भावस्था में होती है तो उसका बजन का बढ़ना आम बात है। क्यूंकि वो चिकनी चीजे और मेवाओं का सेवन ज्यादा करती हैं। और उनका बजन बढ़ता चला जाता है। लेकिन प्रसब के बाद भी उनका बजन कम नही होता है। तो आपने बजन को कम करने के लिए व्यायाम करें और डॉक्टर की सलाह लें क्यूंकि ज्यादा बजन होना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नही होता है।

त्वचा में बदलाव आना

बच्चे को जनम देने के बाद महिलाओं की त्वचा कुछ रुखी सी हो जाती है, और उनकी त्वचा पहले की अपेक्षा और भी रुखी हो जाती है। और उनके स्तन जांघ और पेट की त्वचाखिच जाती है।कुछ दिनों के बाद यहे खुद ही ठीक होने लगती है लेकिन पहले जैसी नही हो पति तो इसके लिए व्यायाम ज़रूरी है।

बालों का झड़ना

बच्चे को जन्म देने के बाद महिलाओं के बालों का पतला होना, बालों का झाड़ना, बालों का टूटना, बालों का सफ़ेद हो जाना और बालों का न बढ़ना यह सारी समस्याए सामने आने लगती हैं।इन सब समस्याओं से बचने के लिए पौष्टिक आहार लें। बैसे तो यहे समस्या खुद ही ठीक हो जाती है।

स्तनों में बदलाव

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जब औरत गर्भावस्था में होती है तो उनके स्तन बड़े और भरी हो जाते हैं। अगर वो अपने स्तन की ठीक से देखभाल न करे तो उनका आकार ख़राब हो जाता हैं।ढीले और लटक जाते हैं और उनका शेप अजीब सा हो जाता है। उनके गर्भासय (युटेरस) में दर्द होने लगता है। और जब महिला बच्चे को दूध पिलाती है

गर्भावस्था में लगातार हार्मोन्स में परिवर्तन के कारण महिलाओं के स्तन भारी और बड़े हो जाते हैं। ऐसे में अगर स्तन की ठीक प्रकार से देखभाल न की जाए, तो इनका आकार बदल जाता है। एक बार स्तन ढीले या लटक जाने पर दोबारा पहले जैसे नहीं हो पाते हैं। युटेरस (गर्भाशय) में भी दर्द महसूस हो सकता है। खासकर स्तनपान कराते समय यह दर्द शुरू हो सकता है, क्योंकि स्तनपान कराने से युटेरस सिकुड़ने लगता है। स्तनों में दर्द भी महसूस हो सकता है। प्रसव के पश्चात स्तनों का आकार भी बढ़ जाता है। प्रसव के दूसरे या तीसरे दिन से आकार बढ़ना शुरू हो जाता है, जो थोड़ा असुविधाजनक हो सकता है।

पैरों में बदलाव आना

महिलाओं में डिलीवरी के बाद शरीर के लिंगामेंट मांसपेशियों और दो हड्डियों के बीच बांधने वाली नलिकाएं थोड़ी ढीली हो जाती है, जिससे पैरों के आकार में परिवर्तन आ जाता है। प्रसव के बाद पैरों हड्डियों का आकार थोडा बदल जाता है। इस कारण महिलाओं के चाल में भी थोडा सा परिवर्तन आ जाता है। इसी वजह से कमर और कूल्हों में दर्द भी रहता है।

 

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