महिलाओं में बांझपन के कारण लक्षण और उपचार

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महिलाओं में बांझपन के कारण लक्षण और उपचार, महिलाओं में कैसे पहचान करे बांझपन के लक्षण

महिलाओं में  क्या है बांझपन ?

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बांझपन एक बीमारी है, कोई अभिशाप नहीं । इसका इलाज संभव होता है । शादी के एक साल बाद असुरक्षित यौन संबंध होने के बाद भी गर्भ धारण  नहीं होता  है तो उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सक से अवश्य जांच करा लेनी चाहिए। क्योकि महिलाओं के गर्भधारण न करने के कई कारण हो सकते हैं। शादी के बाद यदि महिला गर्भधारण नहीं कर पाती है तो कुछ लोग सिर्फ उसी का इलाज या जांच कराते हैं। परन्तु पता यह चलता है कि महिला मां बनने में पूरी तरह से सक्षम है परन्तु  कमी उसके पति के अंदर है। पति का वीर्य ही सही नहीं है जिससे  महिला गर्भधारण कर सके। गर्भधारण करने के लिए सही शुक्राणु की जरूरत होती है। पुरुष की मर्दानगी में कमजोरी है तो वह हारमोन की गड़बड़ी हो सकती है। शुक्राणु नहीं बन रहे है तो उसके अलग कारण होते हैं। इस बीमारी में दोनों का इलाज संभव है। कुछ पुरुष जांच तथा इलाज कराने में शर्म महसूस करते हैं, परन्तु आजकल इलाज हो जाने पर समस्या का समाधान हो जाता है। तो घबरायें नहीं । क्योकि पुरुष का एक शुक्राणु भी ठीक है तो आप पिता बन सकते हैं।

Causes and treatment of sterility banjhpan ke karan aur upchar

Causes and treatment of sterility banjhpan ke karan aur upchar

महिलाओं में गर्भधारण नहीं करने के हैं कई कारण

  • अनियमित पीरियड होना
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  • बच्चेदानी की नली में रुकावट आना
  • अंडा का नहीं बनना या फिर संक्रमण।
  • किसी भी प्रकार का योनि रोग
  • प्रदर
  • गर्भाशय में हवा का भर जाना
  • गर्भाशय पर मांस का बढ़ जाना
  • गर्भाशय में कीड़े पड़ जाना
  • गर्भाशय का उलट जाना अथवा जल जाना

बाँझपन के निवारण

सरोगेट-मां के माध्यम से कई महिलाएं बच्चा प्राप्त करने में सफल हुई हैं। परन्तु हर एक स्त्री इन तकनीकों का इस्तेमाल नहीं कर सकती, क्योंकि महंगी होने के कारण यह हर एक की पहुँच में नहीं हैं।

इंट्रा साइटोप्लाजमिक स्पर्म इंजेक्शन या फिर आईवीएफ तकनीक से गर्भधारण कराया जा सकता है। यदि पुरुष में शुक्राणु एक दम ही नहीं (निल) तो उसके लिए आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन तकनीक अपनाया जाता है। इसमें सीमेन बैंक से दंपती की पर्सनालिटी के मुताबिक डोनर स्पर्म का चुनाव किया जाता है। उन्होंने कहा कि दंपती को 30 साल के पहले परिवार पूरा कल लेना चाहिए। क्योंकि इसी को फर्टाइल पीरियड माना जाता है। 40 साल में अंडा न के बराबर बनता है। इसके बाद समस्या होती है।

बाँझपन के निवारण हेतु उपचार

  • बांझपन की समस्या को दूर करने के लिए 300 ग्राम पानी में सेमर की जड़ को दाल दें। अब इस मिश्रण को अच्छी तरह से उबाल लें। उबले हुए पानी को छान कर मासिक धर्म के खत्म होने के 6 दिन तक लगातार सेबन करने से बाँझपन की समस्या दूर हो सकती है।
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  • 40 ग्राम सोंफ और  80 ग्राम गुलकंद के मिश्रण को चबाने से और  उसके बाद  एक गिलास दूध पीकर आप बांझपन की समस्या से निजात पा सकते हैं।
  • पलाश के दो पत्तों को पीसकर 1 गिलास गाय के दूध में मिला लें। दूध के छानकर मासिक धर्म के खत्म होने के बाद 8-10 दिन तक लगातार पीने से बाँझपन की समस्या दूर हो सकती है।
  • पीपल के फल को सुखाकर उसका चूर्ण बना लें और इस चूर्ण के सेबन के बाद कच्चा दूध पी लें। मासिक धर्म के खत्म होने के 15-20 दिन तक लगातारसेबन करें। ऐसा करने से बांझपन की समस्या दूर हो सकती है।
  • गर्भाशय खुश्क है तो औरत के सर में दर्द होने लगता है। इसके लिए लहसुन, सेंधानामक,समुद्रफेन 5-5 ग्राम की मात्रा में पीसकर और 5 ग्राम इस मिश्रण को पानी में पीसकर रुई में लगाकर योनी के अन्दर गर्भाशय के मुंह पर सोते समय 3 दिन तक रखना चाहिए। इससे गर्भाशय की खुश्की मिट जाती है।
  • स्त्री का अंग का कापना मतलब गर्भाशय में वायुदोष का होना है। हींग को पीस लें और तिल के तेल में मिलाकर रुई में लगाकर गर्भाशय के मुह पर 3-4 दिन लगाकर रखने से गर्भाशय स्थापित हो सकता है।
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  • बरगद के ब्रक्ष की जड़ों को धूप में सुखाकर इसके चूर्ण को दूध में मिलकर महामारी खत्म होने के बाद खली पेट 3-4 दिन तक पीने से बाँझपन की समस्या दूर हो सकती है।
  • अश्वगंधा के चूर्ण को गर्म पानी के साथ लेने से बाँझपन की समस्या दूर हो सकती है।
  • अनार के बीज और छाल को बराबर मात्रा में मिलाएं और उसका महीन चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को कुछ हफ्तों के लिए दिन में 2 बार गर्म पानी के साथ आधा चम्मच लें इससे बाँझपन की समस्या दूर हो सकती है।

 

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